Showing 29–56 of 63 results
Gular ki Jad
-
गुलर जड़ Gular Jad (शुक्र ग्रह) Venus Planet (Gular Root)
- ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, गूलर की जड़ को बहुत शुभ माना जाता है। गूलर जड़ी का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और शुक्र ग्रह को धन, ऐश्वर्य, वैभव, और लग्ज़री लाइफ़ का कारक माना जाता है इसलिए, गूलर की जड़ को धारण करने से कई फ़ायदे हैं।
- शुक्र ग्रह का रत्न हीरा है। यदि कोई व्यक्ति हीरा धारण नहीं कर पा रहा तो वह गूलर की जड़ को अपने हाथ में धारण कर सकता है। इसकी जड़ हाथ में बांधने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
- ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गूलर वृक्ष शुक्र का प्रतिनिधि वृक्ष है। इसमें नियमित रूप से जल अर्पित एवं जड़ी धारण करने से शुक्र की अनुकूलता प्राप्त होती है।
- शुक्र भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण, लावण्य, यौन सुख, प्रेम विवाह आदि का प्रतिनिधि ग्रह है।
- इसलिए शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए गूलर के वृक्ष के जड़ को धारण करना महत्वपूर्ण है। जन्मकुंडली में शुक्र अशुभ स्थिति में हो तो गूलर जड़ के प्रयोग से शुक्र की पीड़ा को शांत किया जा सकता है।
- इसे पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ले आएं एवं इसे चांदी के लॉकेट में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करे इससे आपकी शुक्र सम्बंधित समस्याएं दूर होंगी।
- इसे चांदी के लॉकेट में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करें इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। गुप्त रोगों से मुक्ति मिलती है। भौतिक सुखों की प्राप्ति एवं सुख-सुविधाओं में वृद्धि होती है।
- कला, मीडिया, फ़िल्म, या फ़ैशन से जुड़े लोगों के लिए ये जड़ बेहद ही शुभ साबित होता है। धन-संपदा एवं मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती हैं।
- आर्थिक संपन्न्ता, धन प्राप्ति, भूमि-भवन खरीदने की इच्छा है, तो गूलर की जड़ चांदी के ताबीज में भरकर धारण करें।
- शुक्र ग्रह की कृपा पाने के लिए गूलर की जड़ को सफ़ेद कपड़े में शुक्रवार के दिन धारण करें।
- धारण विधि – शुक्रवार के दिन गुलर की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शुक्र मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रों सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Kali Haldi, Black Turmeric, काली हल्दी, (11 Pc Set)
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614
Specification :-
Delivery Details
| Size: | 2-3 Inch |
| Product: | Black Haldi |
| Colour: | Black |
| Origin : | India |
| Shape: | Oval |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Kela ki Jad
-
केला जड़ (Kela Jad) गुरु ग्रह (बृहस्पति ग्रह) Planet Jupiter (Kela Root)
- हिन्दू ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह गुरु, ज्ञान एवं सद्गुणों का कारक होता है। इस दिव्य जड़ी को धारण करने से जातक के स्वभाव में मानवीय प्रेम, धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वृद्धि होने लगती है।
- वैवाहिक जीवन में सुख शांति लाने एवं संतान प्राप्ति के लिए भी जड़ को धारण किया जाता है। वहीं जिन छात्रों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है, उनके लिए भी यह जड़ लाभकारी है। इस जड़ को हाथ में बांधने से सुख-संपत्ति, ज्ञान में वृद्धि होती है।
- संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, तो भी इसको धारण किया जाता है।
- अगर आपको पेट की समस्या है, तो भी आप इस जड़ को हाथ में बांध सकते हैं।
- बृहस्पति के कारण विवाह में अड़चन आ रही हो, तो केले की जड़ को हाथ में धारण करना फ़ायदेमंद रहता है।
- केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है और इसकी पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- केले की जड़ की परिक्रमा करने से पैसों की तंगी भी दूर होती है।
- केले की जड़ की पूजा करने से गुरु एवं मंगल दोष दूर होता है।
- गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने से भक्तों की सभी शुभ मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- बृहस्पति के शुभ प्रभाव के लिए केले की जड़ धारण करनी चाहिए इसे विशाखा नक्षत्र में ले आएं एवं इसे पीले धागे या पीली धातु में भरकर बृहस्पतिवार को गले में धारण करें इससे आपका बृहस्पति ग्रह मजबूत होगा।
- केले की जड़ को आंखों के लिए भी फ़ायदेमंद माना जाता है।
- अगर किसी व्यक्ति की शादी में बाधा आ रही है तो गुरुवार के दिन पीले कपड़े पहनकर केले की जड़ की पूजा करने से शादी के योग बनते हैं।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति धनवान होने की इच्छा रखता है उसे केले की जड़ को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति की तिजोरी कभी खाली नहीं होती।
- केले की जड़ में खास प्रकार के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर होने वाली सूजन व लालिमा को ठीक कर देते हैं। साथ ही कुछ लोगों की त्वचा पर यह एक एंटी एलर्जिक के रूप में भी काम करती है, जिससे खुजली व जलन जैसी समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।
- केले की जड़ के रस में ऐसे खास प्रकार के तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में अतिरिक्त मात्रा में बन रहे गैस्ट्रिक एसिड के उत्पादन को रोक देते हैं। साथ ही इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण छालों की लालिमा को कम करने में मदद कर सकते हैं।
- धारण विधि – गुरुवार के दिन केले की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम गुरु मंत्र (“ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों सः गुरुवै नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Ketu Mukta Mani
Natural & Energized Ketu Mukta Mani/केतु मणि लॉकेट /Ketu Mani Stone Lab Certified With Pure Silver Locket To Reduce and Remove Impact of Ketu (Weight Can Differ Due To Natural Occurrence Of Stones)
Ketu Mani Stone Locket is the blessing of planet Ketu and this planet is the best remedy for the evil effects of Ketu or the south node of the moon. It is a gem with deep planetary energy and has a very fast effect. Ketu Mani is known as a very powerful stone to reduce and eliminate the negative energy of Ketu. You are duly proven and awakened Ketu Mani is obtained through Tantra Astro.
Specification :-
| Stone Size: | 8-10 CT |
| Stone: | NATURAL KETU MANI |
| Colour: | NATURAL WHITE |
| Bead: | 01 |
| Shape | Oval |
Delivery Details
| Delivery: | Within 3 – 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Khar ke Jad
खैर जड़ (khar Jad) Khar Root (मंगल ग्रह) Mars Planet
खैर या अनंतमूल की जड़ को मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए धारण किया जाता है। ज्योतिष के मुताबिक, खैर की जड़ में मंगल ग्रह का वास होता है। यह जड़ मंगल के बुरे प्रभाव को कम करती है और इससे जुड़ी परेशानियों को दूर करती है। खैर की जड़ को लाल कपड़े में मंगलवार के दिन धारण किया जाता है। धारण विधि – मंगलवार के दिन खैर की जड़ की सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र (“ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर खैर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।Khirni ke Jad
-
खिरनी जड़ Khirini Jad (Khirni Root) Moon Planet ( चंद्र ग्रह)
- ज्योतिष के मुताबिक, खिरनी की जड़ को धारण करने से चंद्रमा से जुड़े बुरे प्रभाव कम होते हैं और मन शांत रहता है।
- खिरनी की जड़ को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर सोमवार के दिन लाकेट में धारण करने से चंद्रमा मज़बूत होता है एवं चंद्र ग्रह संबंधित दोषों का समन होता हैं।
- चंद्रमा से जुड़े बुरे प्रभाव के कारण व्यक्ति कफ़ और लिवर से जुड़ी बीमारियों से घिरा रहता है और मानसिक रूप से विचलित रहता है।
- खिरनी की जड़ चंद्र ग्रह से संबंधित दोषों को दूर करने में सहायक है। चंद्रमा को मन एवं माता का कारक माना जाता है। यदि आपकी जन्म कुडली चंद्र ग्रह राहु, केतु या शनि से प्रभावित है या कोई दुर्योग हैं तो आपको खिरनी की जड़ को धारण करना चाहिए। यह जड़ हमारे मन को एकाग्र करती है।
- धारण विधि – इस उपाय को सोमवार के दिन करें। सोमवार के दिन खिरनी की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंगल मंत्र "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें
Kush Ke Jad
-
Kush Jad (कुश जड़) Kush Root (केतु ग्रह) Ketu Planet
- कुश को दर्भ और पवित्रम के नाम से भी जाना जाता है।
- कुश घास का इस्तेमाल पूजा-पाठ, श्राद्ध, और अन्य धार्मिक कामों में किया जाता है।
- केतु को अध्यात्म और मोक्ष का कारक माना गया है।
- कुश की जड़ में केतु देव का वाश होता हैं। इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से केतु ग्रह जनित सभी दोषों को समन होता हैं एवं केतु ग्रह का आशीष मिलता हैं।
- धनदायक कुश मूल – कुश की “जड़” को धन प्रदायनी कहा गया है। रवि पुष्य योग या रविपुष्य योग में जाकर कुश की जड़ लाकर कुश मूल की साधना की जाती है, सिद्ध करने के पश्चात कुश मूल को किसी लाल कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या भण्डार गृह में रख दें, और प्रति दिन धूप दीप के द्वारा पूजन करते रहें। यह प्रयोग धन-धान्य बढ़ाने वाला कहा गया है।
- भावप्रकाश के मतानुसार कुश त्रिदोषघ्न और शैत्य-गुण-विशिष्ट है। उसकी जड़ से मूत्रकृच्छ, अश्मरी, तृष्णा, वस्ति और प्रदर रोग को लाभ होता है।
- गरुड़ जी अपनी माता की दासत्व से मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत कलश लाये थे, उसको उन्होंने कुशों पर रखा था। अमृत का संसर्ग होने से कुश को पवित्री कहा जाता है। (महाभारत आदिपर्व के अध्याय 23 का 24 वां श्लोक) मान्यता है कि जब किसी भी जातक के जन्म कुंडली या लग्न कुण्डली में राहु/केतु महादशा की आती है तो कुश के पानी मे ड़ालकर स्नान करने से राहु/केतु की कृपा प्राप्त होती है।
- "नास्य केशान् प्रवपन्ति, नोरसि ताडमानते" – (देवी भागवत 19/32) अर्थात कुश धारण करने से सिर के बाल नहीं झडते और छाती में आघात यानी दिल का दौरा नहीं होता। उल्लेखनीय है कि वेद ने कुश को तत्काल फल देने वाली औषधि, आयु की वृद्धि करने वाला और दूषित वातावरण को पवित्र करके संक्रमण फैलने से रोकने वाला बताया है।
Laghu Nariyal Coconut, Mini Coconut, लघु नारियल - Set of 11 Pieces
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614
Specification :-
Delivery Details
| Size: | 2 Inch Approx |
| Product: | Laghu Nariyal |
| Colour: | Brown |
| Origin : | India |
| Material : | Coconut |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Lakshmi Peeli/Yellow Kawri Kodi Peli Cowrie Sea Shell | लक्ष्मी पिली कोड़ी (Natural Yellow) - Set of 21
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614
Specification :-
Delivery Details
| Stone Size: | 1 Inch |
| Product: | Natural Peeli Kawri |
| Colour: | Yellow |
| Origin : | India |
| Metal : | Sea Shell |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Madar ke Jad
-
मदार जड़ Madar Jad (Madar Root) सूर्य ग्रह (Sun Planet)
- इसको ‘मंदार’, ‘आक’, ‘अर्क’ और ‘अकौआ’ भी कहते हैं। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में इसे ‘अकवन’ के नाम से जाना जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।
- इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से सूर्य ग्रह जनित सभी दोषों का समन होता है एवं भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार के पौधे और इसकी जड़ को कई फ़ायदों से जोड़ा गया है।
- मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
- मदार के पौधे की जड़ को लाल धागे से बांधकर रोगी के पैर में बांधने से फ़ीलपांव में आराम मिलता है।
- मदार के पौधे को घर के सामने लगाने और नियमित रूप से पूजा करने से धन की कमी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- मदार के पौधे को घर के अग्नि कोण यानी कि दक्षिण पूर्व के बीच दक्षिण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।
- मदार के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं। इन पत्तों का इस्तेमाल करने से चोट जल्दी भरती है और बवासीर में भी आराम मिलता है।
- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।
- रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
- अगर किसी जातक पर तांत्रिक अभिकर्म किया गया है, तो मदार जड़ का एक टुकड़ा अभिमंत्रित करके कमर में बांधने से तांत्रिक क्रिया निष्फल हो जाती है।
- अगर कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रसित है, तो रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मदार की जड़ को या बंध्या स्त्री अपनी कमर में बांध ले, तो उसे सन्तान का सुख अवश्य मिलेगा।
- अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं, तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको उस कमरे में बांध दें, जिसकी संतान न हो रही हो।
- धारण विधि – रविवार के दिन मदार जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।
Nagarmotha ke Jad
-
नागरमोथा की जड़, राहु ग्रह (Rahu Planet) Nagar Motha ki jad (Nagar Motha Root)
- नागरमोथा की जड़ में राहु देव का वाश होता हैं, नागरमोथा की जड़ को धारण करने से राहु ग्रह संबंधित दोष दूर होते हैं एवं राहु देव की कृपा मिलती हैं।
- इससे मानसिक तनाव एवं पुरानो रोगों से मुक्ति मिलती है। यदि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है तो इस जड़ को धारण करने से यह दोष शांत होता है। नागरमोथा की जड़ व्यक्ति में साहस बढती है और राह में आने वाली कठिनाई को दूर करती है।
- नागरमोथा की जड़ को धारण करने से साहस बढ़ता है और राह में आने वाली कठिनाइयां दूर होती हैं। शनिवार के दिन इस दिव्य जड़ी नागरमोथा की जड़ को धारण करें।
- इसे पुष्य नक्षत्र में ले आएं और बुधवार को नीले धागे में गले में धारण करें।
- मानसिक तनाव, शारीरिक रोग और काल सर्प दोष से बचने तथा नौकरी से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए नागरमोथा की जड़ वरदान साबित होती है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन नागरमोथा की जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ को सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिने हाथ की बाजू में बाँध लें।
Narmadeshwar Shivling, Lord Shiva Narmada Shivlingam Stone One Pc , (नर्मदेश्वर बाणलिंग शिवलिंग) 3 Inch
सर्वशक्तिशाली और पवित्र नर्मदेश्वर शिवलिंग
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614 Specification :-| Size: | 3 Inch Plus |
| Product: | Narmadeshwer Lingam |
| Colour: | Mix |
| Origin : | India |
| Shape: | Oval |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Narmadeshwar Shivling, Lord Shiva Narmada Shivlingam Stone Pendant, (नर्मदेश्वर बाणलिंग शिवलिंग पेंडेंट) 1 Inch
सर्वशक्तिशाली और पवित्र नर्मदेश्वर शिवलिंग
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614 Specification :-| Size: | 1 Inch Plus |
| Product: | Narmadeshwer Lingam |
| Colour: | Mix |
| Origin : | India |
| Shape: | Oval |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Natural Energized Chandra Mani (चन्द्र / चंद्रकांत मणि)
-
Natural Energized Very Rare Chandra / Chandra Kant Mani Pendant Lab Certified (दुर्लभ चन्द्र / चंद्रकांत मणि)
-
It is said to give mental peace and stability, controls anger and excitement, provides emotional harmony and well being, improves concentration and martial relations.
-
It is a harmless stone and is used by ancient Hindus as a representative of Chandra (Moon).
-
Natural Chandra Mani (Moonstone) has an immense power to control emotions.
-
Chandra Mani is a semiprecious gem made of sodium potassium aluminum silicate.
-
Natural Chandra Mani is a “stone of new beginnings”.
-
Natural Chandra Mani (Moonstone) has an immense power to control emotions.
-
Chandra Mani is a semiprecious gem made of sodium potassium aluminum silicate.Natural Chandra Mani is a “stone of new beginnings”.
Natural Gomati/Gomti Chakra (White) – 21 Pieces
- Natural & Real Gomti Chakra From Gomati River
- Gomti Chakra Best For All Kind Of Protection Of Everyone From Evil Effects, Increasing Your Spirituality Also
- Natural Gomati Chakra Brings Prosperity In Your Life, Increasing Wealth And Get Happiness.
- Delivery Details
Delivery: Within 3 - 4 Business Days Free Shipping: All over India Order On Whatsapp: 8789543614 Free Energization: This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest
Natural Mangal Kaanta
Natural Mangal Kaanta With Pure Silver Cap | Charm Mars Thorns | मंगल काँटा | (Weight Can Differ Due To Natural Occurrence Of Stones)
Mangal Kanta (Mars thorn) is obtained from fish. It is kept with oneself to remove various problems related to Mars. If a person is a manglik and is facing problems in his marriage, then he can keep it with him and wear it. Along with reducing the effect of Mars dasha, it is very useful for Shani's Sadesati, Dhaiya and Shani dasha & ETC. Specification :-| Stone Size: | 10-15 CT |
| Stone: | NATURAL MANGAL KANTA |
| Colour: | NATURAL WHITE |
| Bead: | 01 |
| Shape | Oval |
| Delivery: | Within 3 – 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
Natural Shukra Mani
100% Pure & Natural Energized Shukra Mani (शुक्र मणि) Rare & Biggest Size, 100 Carat Size Approx, Made In Silver Pendant.
it is mandatory to get the grace of Venus planet for the help of love, wealth, attraction, beauty and happiness in life and Venus brings grace to God Shukra Mani is a miraculous mani works for you to please Venus, the god of happiness and love Venus’s gem can make your life full of pleasures and rich with wealth.
Navgraha Jadi Kavach (नवग्रह जड़ी कवच)
“दिव्य तंत्र एस्ट्रो सिद्ध नवग्रह जड़ी यंत्र कवच”
-
जिन्हें नवग्रहों के अनेक अशुभ एवं अनिष्ट दोष, अशुभ दशा/महादशा, ग्रह पीड़ा, कमजोर ग्रह, मारक प्रभाव जैसा अनेक कारण परेशानी एवं समस्याओं का सामना कर रहे है। नवग्रहों की अनुकूलता, शुभता, नवग्रह संबंधित सभी प्रकार के अनिष्ट एवं अशुभ दोषों के समन / शांति एवं सम्पूर्ण शुभ फल प्राप्ति हेतु शास्त्र वर्णित सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित कवच।
-
इस दिव्य कवच में शास्त्र वर्णित दिव्य औषध नवग्रह वृक्षराज की जड़ को शास्त्र निर्देशित विधि से निमंत्रण एवं निवेदन विधि उपरांत विशेष शुभ नक्षत्र, वार एवं दिवस पर लाया जाता —
-
जैसे, सूर्य ग्रह के लिए – मदार / बिल्वपत्र की जड़, चंद्र – पलास / खिरनी की जड़, मंगल – अनंतमूल / खैर की जड़ / बरगद जड़, बुद्ध – अपामार्ग / विधायरा की जड़, गुरु – भारंगी / केला की जड़, शुक्र – अरंड मूल / सरपोंखा / गूलर की जड़ / , शनि – बिच्छू / शम्मी की जड़, राहु – नागरमोथा की जड़ / सफ़ेद चंदन / दूर्वा दूब की जड़, एवं केतु – अश्वगंधा / कुश की जड़ को लिया गया हैं।
-
इस दिव्य कवच में शुद्ध प्राकृतिक भोजपत्र पर हस्त निर्मित, शुद्ध अष्टगंध से शास्त्र निर्देशित विधि विधान से विशेष शुभ नक्षत्र एवं दिवस पर नवग्रह यंत्र का निर्माण किया जाता हैं।
-
शास्त्र वर्णित पूर्ण विधि विधान के साथ सभी दिव्य नवग्रह औषध जड़ियों एवं नवग्रह यंत्र को शुद्ध ताम्र की ताबीज़ के साथ “तंत्र एस्ट्रो” के विद्वान् वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा आपके नाम और गोत्र से शुद्धिकरण की क्रिया, नवग्रह मंत्र द्वारा अभिमंत्रित, जागृत एवं प्राण प्रतिष्ठित किया जाता हैं ताकि इस कवच का संपूर्ण लाभ आपको मिले।
-
इस कवच को 9 ग्रह/12 राशि एवं 27 नक्षत्र को ध्यान में रख कर निर्माण किया गया हैं। इसे कोई भी व्यक्ति, सभी राशि एवं लग्न के जातक/जातिका धारण कर सकते हैं। इस दिव्य कवच का किसी भी प्रकार का कोई भी दुष्परिणाम नहीं है।
-
इस दिव्य कवच को मात्र लागत दक्षिणा पर आप सभी के लिए उपलब्ध कराया गया हैं ताकि अधिक से अधिक सभी वर्ग के लोगों को इस दिव्य कवच का संपूर्ण लाभ मिल सके
-
आज ही इस “दिव्य तंत्र एस्ट्रो सिद्ध नवग्रह जड़ी यंत्र कवच” ऑर्डर करे एवं इस दिव्य कवच की चमत्कारी दिव्यता को प्रत्यक्ष अनुभूत कर जीवन को सुखी बनाए।
नोट – ऑर्डर के समय अपना नाम या गोत्र Order Note में लिखे या WhatsApp करे।
Original Abhimantrit Dakshinavarti Shank Very Large, Puja Shankh, More Than 7 Inches (Superfine Quality)
Buy Now !! Limited Stock Offers Only - Upto 72% Off
Any Query WHATSAPP Or CALL NOW +91-878-954-3614
Specification :-
Delivery Details
Benefits of Dakshinvarti Heera Shankh -
| Size: | 7.5 - 8 INCH |
| Stone: | Shank |
| Colour: | White |
| Material: | Conch Shell |
| Shape: | Triangular |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
- Prosperity to the house, shop or office.
- No shortage of food, money or clothes.
- Brings peace to the premises.
- If kept in the bedroom, it brings harmony among the couple.
- If kept during a religious gathering, it brings knowledge by evoking Goddess Lakshmi, Saraswati and Parvati.
- Enlightens the students with knowledge and sharpens their memory.
- Fill it with Ganges water and sprinkle it on a person or in a premises. Malefic planetery effects and black magic evils disappear.
- Removes ill-effects of Brahmhatya, Gau-hatya and Bal-hatya (Dosha due to killing of a priest, cow or a child in the previous births).
- This is also called a pani Shankha as after puja the sacred water is stored inside this and splashed to people as shanti jal.
- This shankh is a compulsory item for Durga Puja, Laxmi Puja. It is also used as an item for Aarti of Goddess.
- This is also known as Valampuri Laxmi Sankhaor Sanggu. The scientific name is Sinistral Turbinella Pyrum.
Original Energized Kamakhya Sindoor Guarenteed Natural Kamiya / Kamya Sindur / Sindhoor 100g
Original Natural Kali Haldi Black Turmeric 500g
Original Parad (Mercury) God Shiva Lingam Shivling
WHATSAPP Or CALL NOW +91-8789543614
Specification :-| Size: | 1.5 Inch (Approx) |
| Metal: | Parad (Mercury) |
| Colour: | Silver |
| Weight: | 150 Gram (Approx) |
| Shape: | Shiv Lingam |
| Delivery: | Within 3 - 4 Business Days |
| Free Shipping: | All over India |
| Order On Whatsapp: | 8789543614 |
| Free Energization: | This Remedy is Free Energized by Tantra Astro Priest |
- The native begets the wealth and prosperity he has been asking for
- It is a very good remedy for kaal sarpa and mangal dosha in the individual horoscope of the native.
- One can win over his ego, anger, and anxiety by worshipping this parad shivaling
- The Vedic Brahmins of Tantra Astro chant the Lord Shiva mantra thousand and eight times to energize it and only after that it is sent to you. Only then it gives you the full benefits.
Palas ki Jad
-
Palash Jad (पलाश जड़) Palash Root (चंद्र ग्रह) Moon Planet (Palash Root)
- ज्योतिष में पलाश के पेड़ और इसकी जड़ का बहुत महत्व है। पलाश (पलास, छूल, परसा, ढाक, टेसू, किंशुक, केसू) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलों के कारण इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है।
- पलाश की जड़ में चंद्र ग्रह का वाश होता हैं। विधि विधान से इस दिव्य पलास जड़ को धारण करने से चंद्रमा जनित समस्त दोष एवं पीड़ाओं का समन होता हैं, चंद्र देव के कृपा दृष्टि प्राप्त होती हैं।
- पलाश के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, और महेश तीनों देवताओं का वास माना जाता है।
- पलाश के पेड़ का इस्तेमाल धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
- रविवार के शुभ मुहूर्त में पलाश की जड़ को सूती धागे से लपेटकर दाहिने हाथ पर बांधने से बीमारियों में आराम मिलता है।
- पलाश की जड़ से निकलने वाले अर्क की दो बूंदें आंखों में डालने से नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।
- पलाश की जड़ को शुभ मुहूर्त में किसी रविवार के दिन निकालकर दाहिनी भुजा में बांधने से ज्वर दूर होता है।
- जिन व्यक्तियों का सूर्य ग्रह पीढ़ित होकर अशुभ फल दे रहा है वे जातक पलाश की लकड़ी से हवन करे या फिर पलाश की जड़ को अभिमन्त्रित करके चांदी के लाकेट में गले में धारण करें।
- जिस जातक को अधिक परिश्रम करने पर भी व्यापार में सफलता नहीं मिल रही हो, तथा लगातार कर्ज की समस्या बढ़ रही हो। वह व्यक्ति शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पलाश की जड़ लें आयें। इसे स्वच्छ जल से साफ कर लें उसके पश्चात एक कमरे में सुविधानुसार कोई स्थान चुन कर गंगाजल अथवा गोमूत्र से छींटे मारकर स्वच्छ कर लें एवं उसके उपर एक पात्र रखकर, पात्र पर लाल रेशमी कपड़ा बिछाए, पात्र के बीच में 7 प्रकार अनाज लेकर सभी को मिलाकर एक ढेरी बनायें। इस पर पलाश की जड़ रखें तथा इसी पर दीपक जलायें। धूप जलाकर लक्ष्मी जी के किसी भी मन्त्र की 3 या 4 माला का जाप करें। उसके पश्चात अब इस जड़ को एक लाल कपड़े में बांधकर अपने गल्ले या धन रखने के स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक तंगी एवं समस्यायें धीरे- धीरे दूर होकर आर्थिक सम्पन्नता आ जायेगी।
- धारण विधि – सोमवार के दिन पलाश जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम चंद्र मंत्र (“ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Pipal Ki Jad
-
पीपल जड़ Pipal Jad (Pipal Root)
- पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इसकी जड़ को धारण करना एवं घर के मुख्य द्वार पर बांधने से घर में सकारात्मकता आती है सभी ग्रह दोष शांत होते हैं।
- इससे घर का वास्तु दोष दूर होता है और ग्रह दोष से भी छुटकारा मिलता है।
- शुक्रवार को पीपल की जड़ बांधने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति मज़बूत होती है।
- हाथ में पीपल की जड़ पहनना शुभ माना जाता है।
- पीपल की जड़ में अर्पित थोड़ा सा जल घर में लाकर छिड़कने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
- किसी मंदिर में पीपल का एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
- पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधने से धन बाधित करने वाले दोषों को भी दूर किया जा सकता है। अगर घर के मुख्य द्वार पर पीपल की जड़ को शुक्रवार के दिन बांधा जाए तो इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है। तंगी, कर्ज, आखिक खर्च आदि से छुटकारा मिल जाता है।
- इसके अलावा, घर के मुख्य द्वार पर पीपल के पेड़ की जड़ बांधने से घर का वास्तु दोष भी दूर हो जाता है। अगर आपका घर या घर की कोई भी वस्तु उचित स्थान या उचित दिशा में नहीं है तो उससे पैदा होने वाला वास्तु दोष अपने आप खत्म हो जाएगा। साथ ही, ग्रह दोष से भी छुटकारा मिल जाएगा।
- ज्योतिष शास्त्र कहता है कि पीपल के पेड़ में सभी देवी और देवताओं का वास होता है। ऐसे में अगर पीपल के पेड़ की जड़ को घर के मुख्य द्वार पर बांधा जाए तो इससे घर के मुख्य द्वार पर दिव्य शक्तियों का संचार होने लगता है। घर के मुख्य द्वार पर सकारात्मकता बढ़ने लगती है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नष्ट हो जाता है।
- धारण विधि – शनिवार के दिन पीपल जड़ सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम मंत्र (“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को पीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांधे।
Pure Ashtagandha Chandan
Tantra Astro Pure & Original Ashtagandha Danedaar Chandan (शुद्ध अष्टगंध चंदन) pack of 100 gram, It is made forusing holy mixtures of pure eight fragnance herbs which are (सफ़ेद या लाल चन्दन ) (White or Red Chandana) अगर (Agar) कपूर (kapoor or Camphor)कचूर (Kachoor) कुमकुम (रोली ) (Kumkum) गोरोचन (Gorochan) जटामासी (Jatamasi) रक्तचंदन (Raktchandana), Weight - 100 gram
Safed Chandan Ki Jad
-
सफ़ेद चंदन जड़ (Safed Chandan Jad) Safed Chandan Root (White Sandalwood Root) राहु ग्रह (Rahu Planet)
- चन्दन की जड़ी राहु ग्रह जनित सभी दोषों, पीड़ाओं एवं बुरे प्रभाव से बचाती है। ज्योतिष में राहु ग्रह क्रोध, नशा, धुआं, बुरी संगत, मांसाहार, चालाकी, क्रूरता, लालच, अपशब्द आदि का कारक होता है।
- राहु दोष को दूर करने में चन्दनमूल की जड़ी बेहद कारगर है। इसके अलावा यह जड़ी शारीरिक रोगों को दूर करती है, जैसे मूत्र संबंधी विकार, त्वचा रोग, गैस्ट्रिक, चिड़चिड़ापन, पेचिश और बुखार आदि।
- महिलाओं को गर्भाशय से जुड़े रोग, त्वचा की समस्या, गैस प्रॉब्लम, दस्त, और बुखार में सफ़ेद चंदन की जड़ का फ़ायदा होता है।
- बार-बार दुर्घटनाएं होने पर भी सफ़ेद चंदन की जड़ का इस्तेमाल करना चाहिए।
- चंद्रमा की स्थिति मज़बूत करने के लिए, कनिष्ठा उंगली से माथे पर सफ़ेद चंदन लगाना चाहिए।
- वैवाहिक जीवन में खुशियां लाने के लिए, किसी शुभ मुहूर्त में चंदन की जड़ को गंगाजल से शुद्ध करके फ़िटकरी के साथ कमर में बांधा जाता है।
- चंदन की जड़ से स्नान करने से शनि की अशुभता दूर होती है। ऐसा 40 दिनों तक करना चाहिए।
- सफ़ेद चंदन का टुकड़ा या जड़ को शनिवार या सोमवार को सफ़ेद या भूरे रंग के कपड़े में बांधकर पास रखना चाहिए।
- धारण विधि – शनिवार / बुधवार के दिन सफेद चंदन जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम राहु मंत्र (“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध ले।
Sammi ki Jad
-
Sammi Jad (शम्मी जड़) Sammi Root (शनि ग्रह) Saturn Planet
- ज्योतिष के अनुसार, जो लोग नीलम रत्न धारण नहीं कर सकते वो लोग शमी की जड़ हाथ में बांध सकते हैं। जिसका फल भी व्यक्ति को नीलम के बराबर ही प्राप्त होगा और शनि दोष, साढ़ेसाती इत्यादि से जल्द छुटकारा मिल जाता हैं। शमी को गणेश जी का प्रिय पेड़ माना जाता है।
- सामान्य रूप से शनि ग्रह (पाप ग्रह) अच्छा नहीं माना जाता है, परंतु यदि जीवन में इसकी कृपा दृष्टि बरसती है तो व्यक्ति के भाग्य खुल जाते हैं। यह हमारे कर्म का कारक होता है। शनि दोष के कारण व्यक्ति का जीवन कष्टमय गुजरता है। इसलिए इसके बुरे प्रभाव से बचने एवं कृपा दृष्टि पाने के लिए इस दिव्य शम्मी जड़ को धारण करना शुभ माना जाता है।
- आयुर्वेद की दृष्टि से तंत्रिका और गठिया रोग से मुक्ति पाने के लिए भी यह बेहद कारगर हैं।
- शमी की जड़ को हाथ में बांधने से शनि दोष और साढ़ेसाती से जल्द छुटकारा मिलता है।
- शमी की जड़ को तकिये के नीचे रखने से बुरी शक्तियां प्रभावित नहीं कर पातीं और मन शांत होता है।
- शमी की जड़ को घर की पश्चिम दिशा में काले कपड़े में लपेटकर रखने से शनिदेव खुश होते हैं और नकारात्मकता दूर होती है।
- धारण विधि – शमी की जड़ को शनिवार के दिन धारण करना चाहिए। शनिवार के दिन शम्मी जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शनि मंत्र (“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को नीले कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।
Sharpunkha ki Jad
-
Sharpunkha ki Jad (शरपुंखा जड़) Sharpunkha Root
- ज्योतिष के मुताबिक, शुक्र ग्रह को आकर्षण, ऐश्वर्य, सौभाग्य, धन, प्रेम, वैभव, सौंदर्य, कला, संगीत, कामवासना का कारक माना जाता हैं।
- शुक्र ग्रह को तुला और वृषभ राशि का स्वामी माना जाता है। कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति के हिसाब से व्यक्ति का जीवन प्रभावित होता है। शुक्र ग्रह मज़बूत होने से व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व का होता है और उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति कम उम्र में ही हो जाती है।
- वहीं, शुक्र ग्रह कमज़ोर होने से व्यक्ति को शारीरिक और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- शुक्र के लिए सरपोंखे की जड़ धारण करनी चाहिए इसे पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में ले आएं एवं चांदी के लॉकेट या सफेद कपड़े में या चांदी की चेन में शुक्रवार को धारण करें जिससे आपकी शुक्र जनित समस्त दोष, पीड़ा एवं समस्याएं दूर होंगी।
- अंग्रेज़ी में इसे पर्पल टेफ्रोसिया, वाईल्ड इण्डिगो या फिश पॉयजन ट्री के नाम से जाना जाता है। इसके अन्य स्थानीय नाम है – आहुहु, बज़्रदंती, शरपुंखा, प्लीहशत्रु, कण्ठपुंखिका, श्वेतपुंखा, कंठालु, कालिका, वाणपुंखा, सरफोंका, तथा बननील। शरपंखा का पौधा नील (Indigo) के पौधे से मिलता-जुलता है।
- धारण विधि – शुक्रवार के दिन शरपुंखा जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम शुक्र मंत्र (“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को सफ़ेद कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बाँध लें।



























