चमत्कारी राज मोहिनी जड़ी (Raj Mohini Jadi For Vashikaran)

मोहिनी जड़ी एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही शरीर में एक रोमांच पैदा हो जाता है। राज मोहिनी जड़ी वशीकरण मंत्र, कई जड़ी-बुटियों में भी वशीकरण, सम्मोहन और तंत्र-मंत्र का जबरदस्त प्रभाव छिपा होता है। उनमें कुछ हमें हमारे आसपास आसनी से मिल जाती हैं, जबकि कुछ बहुत ही दुर्लभ होती हैं। इन्हीं में से एक दुर्लभ पौध है राज मोहिनी। इस पौधे की जड़ का उपयोग तंत्र-मंत्र और वशीकरण के लिए बहुत ही प्राचीनकाल से होता आया है। यह एक विशेष किस्म का पौधा है। इसक पत्तीयां मोटी और चिकनी मिश्रित हरे-पीले रंग की होती हैं। इसे बगीचे में उगाया नहीं जा सकता। मोहिनी एक प्रकार की जड़ी है जो तंत्र पूजन में प्रयोग की जाती है ज्यादातर सम्मोहन या वशीकरण में। आप इसे यन्त्र या कवच के रूप में भी बनवा सकते है। रहस्यमई मोहिनी विद्या के लिए मोहिनी शब्द प्रयुक्त होता है, हम बात कर रहे हैं उस रहस्यमई जड़ी राज मोहिनी नामक वनस्पति की ।

पहचान के लिए अगर आप हाथ मे लेकर इसे पानी मे डाल कर बाहर निकालेंगे तो यह अपने आप घूमने लगती है और विशेष बात यह है कि ये हमेशा सीधी दिशा मे ही घूमती है कभी उल्टी दिशा में नहीं घूमती, और यदि दो जड़ी को एक साथ पानी में डाल कर निकालेंगे तो यह दोनों आपस मे एक दूसरे से लिपअट जाती है मोहिनी जड़ी भगवन विष्णु के मोहिनी अवतार का ही स्वरुप मानी जाती है इसीलिए इसमें प्राकृतिक रूप से सम्मोहन की शक्ति है। मोहिनी जड़ी को मोहिनी क्रिया में प्रयोग किया जाता है, Tantra Astro द्वारा असली शुद्ध मोहिनी उपलब्ध है जो की व्यक्ति विशेष के नाम एवं कार्य अनुसार यंत्र में सिद्ध अभिमंत्रित जाग्रित कर दिया जाता हैI

यह नाचने वाला पौधा भी कहलाता है, जो पानी के संपर्क में आते ही स्वतः हिलने-डुलने लगता है। इसकी जड़ में ही मोहिनी शक्ति होती है। वास्तु शास्त्र की तरह चीन की चर्चित फेंग शुई में भी इस पौधे का जिक्र क्रोसुला नाम से किया गया है। इसके अनुसार भी घर में रख देने मात्र से पैसा अपनी ओर खींचता है। इसकी पत्तियां अन्य पौधों के पत्ते की तरह आसानी से टूटती नहीं हैं। यह दुर्लभ पौधों में से एक है, जिसकी पहचान जड़ी-बुटियों का जानकार ही कर सकता है। अनुभवी व्यक्ति ढूंढकर इसकी जड़ी को जमीन से निकाल पाता है। तंत्रिक के अनुसार इसे विशेष रात्री के समय में एक विशेष मंत्र जाप के साथ निकाला जाता है। इससे राज मोहिनी जड़ी की विशिष्टता और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है और इसके इस्तेमाल के लिए तांत्रिक की सलाह के आनुसार ही किया जाना जरूरी है। राज मोहिनी जड़ी की विशिष्टता और प्रभाव संबंध में कुछ तथ्य और मान्यताएं इस प्रकार हैंः-

  • सबसे पहले तो यह की मोहिनी जड़ी बूटी को राज मोहिनी जड़ी बूटी के नाम से भी जाना जाता हैं।
  • यह जड़ी बूटी बहुत ही दुर्लभ मानी जाती हैं, यह जुडी बूटी आपको कही पर भी आसानी से नहीं मिलती, या फिर ऐसा मानो की इस जड़ी बूटी की प्रजाति विलुप्त हो रही हैं, अगर आपको कही पर यह जड़ी बूटी मिल जाए तो यह बहुत अच्छी हैंI
  • इस जड़ी बूटी को बहुत ही रहसयमय जड़ी बूटी माना जाता है, क्योंकि यह किसी वनस्पति की जड़ में से प्राप्त होती हैंI
  • इस जुडी बूटी की खास बात यह है की इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल ज्योतिष शास्त्र, आयुर्वेदिक तथा तंत्र मंत्र वशीकरण आदि में भी किया जाता हैंI
  • इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक में कम बुद्धि लोगो के लिए किया जाता हैं, ताकि इस जड़ी बूटी से व्यक्ति की बुद्धि में वृद्धि हो सकेI
  • ज्योतिष शास्त्र में इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल धन की प्राप्ति के लिए किया जाता हैं, ऐसा माना जाता है की इस जड़ी बूटी के इस्तेमाल से हम हमारे धन में वृद्धि कर सकते हैंI
  • तंत्र मंत्र और वशीकरण विद्या में इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए किया जाता हैं, तांत्रिक इस जड़ी बूटी का इस्तेमाल व्यक्ति को वशीकरण करने के लिए करते हैंI
  • वैसे तो इसके पास से गुजरने वाला हर व्यक्ति उससे आकर्षित हो जाता है, लेकिन इसका सक्रिय प्रभाव व्यक्ति के सामने जड़ी को पानी में डालने पर ही दिखता है।
  • इसके पानी में डालते ही यदि वह तेजी से घुमने लगे तो समझें वह व्यक्ति आपके वश में आ चुका है। उससे अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते हैं। यानी आप जो कहेंगे उसका वह पालन करेगा। इस प्रभाव का सकारात्मक इस्तेमल करना चाहिए।
  • इसे पानी में डालकर बाहर निकालते ही सीधी दिशा में घूमती है। यह कभी भी उल्टी दिशा में नहीं घूमती। दो जड़ी को पानी में डालने पर वे आपस में लिपट जाती हैं।
  • इस जड़ी को धारण करने के कुछ नियम बताए गए हैं। जैसे इसे पहनने की बात गुप्त रखें। भगवान विष्णु की आराधना करें। गलत और छल-कपट जैसे कार्य नहीं करें। अनैतिक यौन संबंध के लिए पर स्त्री गमन नहीं करें।
  • इस रहस्यमी जड़ी से किसी भी तरह का वशीकरण संभव है। इसे हासिल करने का अर्थ भगवान विष्णु की कृपा का होना होता है। कारण इसे विष्णु के स्वरूप माना गया है।
  • मान्यता है कि यदि इसे कोई चखकर जिस किसी व्यक्ति को मुस्कुराते हुए देख ले, और वह भी उसकी मुस्कुराहट का जवाब मुस्कुराहट से दे तब उसपर सम्मोहित हो जाता है। उसकी समस्त भावनाएं और सोच का वशीकरण हो जाता है।
  • इसका इस्तेमाल अलग-अलग कार्यों के लिए विभिन्न विधियों से किया जाता है। जिसमें मनोवांछित कार्य में सफलता या किसी के वशीकरण जैसे कार्य हो सकते हैं।
  • कारोबार में उन्नति, शादी में हो रहे विलम्ब या मनपसंद जीवन साथी की प्राप्ति में इसका तांत्रिक उपयोग किया जा सकता है। इसका उपयोग राजनीतिक प्रभाव और सामाजिक मान-मर्यादा बढ़ाने में भी होता है।
  • इसकी मदद से सामूहिक सम्मोहन भी किया जा सकता है। किसी सभा को संबोधित करते हुए कक्षाओं में स्टुडेंट की पढ़ाई के प्रति एकाग्रता बनाने आदि में राज मोहिनी जड़ का सकारात्मक प्रयेग किया जा सकता है।
  • इसके इस्तेमाल से पति-पत्नी के बीच आपसी संबंध मधुर बनते हैं और उनका जीवन सुखमय बीतता है। स्त्री या पुरुष दोनों एक दूसरे के सम्मोहन के लिए शुभ मुहूर्त में धारण कर सकते हैं।
  • प्रेमियों के लिए विवाह का योग बनाने में राज मोहनी जड़ी का अचूक असर होता है।
  • इसका अधिक इस्तेमाल तांत्रिक साधनाओं के लिए किया जाता है। जिसमें भूत-प्रेत और भटकी आत्माओं को आकर्षित करने जैसी क्रियाएं हैं। वे भूत-प्रेत की चपेट में आए व्यक्ति को इस प्रयोग से छुटकारा दिलाते हैं। तांत्रिक साधन से राज मोहिनी जड़ी के प्रभाव से अकस्मिक मृत्यु के कारण भटकती आत्मा को भी मुक्ति मिल जाती है।
  • इसका औषधीय उपयोग मनोरोग में किया जाता है, जबकि इसके धारण करने से नौकरी के लिए इंटरव्यू सफलता मिलती है।
  • इसे पीसकर सम्मोहनकारी तिलक बनाया जाता है, जिसके उपयोग से वशीकरण किया जा सकता है।
  • तांत्रिक की सलाह के अुनसार इसका उपयोग गलत धारणा से नहीं करना चाहिए। जैसे किसी का वशीकरण उसके द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को परेशन करना या दुश्मनी बढ़ाना। इसी तरह से गलत धारणा से किसी स्त्री का वशकरण करने इस जड़ी का घरेलू कलह जैसा परिणाम भी पड़ सकता है।

नोट – हमारे द्वारा Tantra Astro उपलब्ध सभी प्रकार के रुद्राक्ष एवं तंत्र, ज्योतिषी सामग्री को हमारे अनुभवी विद्वान पंडित जी द्वारा अभिमंत्रित एवम् सिद्ध कर के आपके पास भेजा जाता है, जिससे आपको अति शीघ्र इसका पूर्ण लाभ मिल सके।

Raj Mohini jadi

Raj Mohini jadi is a special kind of jadi an extraordinary herb which is found in the forest. It is used in special kinds of tantric karma especially for attraction sammohan, vashikaran, it is specially wished by experts or tantrik priests for particular purposes, for love, health wealth, and much more. Best For Business and Getting More And More Profit In All Type Of business. How To Know Mohini Jadi Is Original or Not.? put this jadi in a water of bowl and see for 1 to 5 mints only and you can see that this jadi automatic moving. How to use for Money luck and power. every day in the morning take a fresh water in bowl and put this Mohini jadi in water and keep at safe place and same day evening put out from water and keep safe. You fill that this Mohini jadi work every day and due to this your luck also work, do this every day. this is very powerful to attract luck money and all think which is you want.

 

अति दुर्लभ मच्छमणि (मकरध्वज) Macch Mani

अत्यंत दुर्लभ मणि मच्छमणि (मकरध्वज), मच्छमणि एक दुर्लभ मणि है। राहू ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए इस मणि से बेहतर और कोई मणि नहीं हैं।  छाया ग्रह राहू के दोष को शांत करने के लिए मच्छ मणि से बेहतर और कोई उपाय इस संसार में मौजूद नहीं है। इस एक रत्न की मदद से व्यक्ति अपने जीवन की हर मुश्किल से मुक्ति पा सकता है और अपने जीवन को सुखी बना सकता है। अगर जीवन से हताश या निराश हैं तो, इस मणि को जरुर धारण करें।

मच्छ मणि के चमत्कारी लाभ

➡️राहू ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए या राहू की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हैं, तो मच्छ मणि को धारण करना लाभदायक होता हैं।

➡️जो व्यक्ति राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय है और सफल होने की इच्छा रखते है, उन्हें मच्छमणि जरुर धारण करना चाहिए।

➡️आप भी ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीने के सपने देखते है परन्तु धन की कमी के कारण सभी सपने साकार होने से पहले ही मुरझा जाते है तो मच्छमणि आपको अवश्य धारण करना चाहिए।

➡️यदि किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, कालसर्प दोष के कारण जीवन में आए दिन नई नई मुसीबतें आ रही है, मानसिक शारीरिक तथा आर्थिक कष्ट बढ़ रहे है तो मच्छमणि रत्न अवश्य धारण करना चाहिए।

➡️इस रत्न के प्रभाव से कालसर्प दोष के कारण उत्पन्न होने वाले कष्टों का निवारण बहुत जल्दी हो जाता है।

➡️इसे धारण करने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के कामकाज तनाव से बाहर आकर एक खुशहाल जीवन व्यतीत करता है।

➡️राहु ग्रह बाधा निवारण के लिए यह अचूक मणि है। हार गए है या थक गए है तो एक बार मणि को जरूर धारण करें, आपके लफ्ज न बदल जाये तो बताना।

➡️राहु कि महादशा/आंतर दशा चल रही हौं तो रात को एक कटोरे में मणि रख कर ऊस पर समुद्री नमक से भरें सुबह मणि को कच्चे दुध एवं गंगा जल से धो कर कलाई पर बांध लें।

➡️कुंडली मे राहु गृह जन्मपत्री मे राहु गृह गोचर या दशा मे पीड़ित होने पर व्यक्ति की मतिभ्रम, छल-कपट, झूठ बोलना, चोरी, तामसिक भोजन, ज्यादा नशा करना, षड्यंत्र, छिपे शत्रु, अनैतिक कर्म, आलस्य, नकारात्मक सोच व टोने टोटका, तंत्र मंत्र से पीड़ित होता है। ऐसे व्यक्ति को मच्छ मणि हाथो या गले मे मंत्र जाप कर धारण करनी चाहिए।

➡️काला जादू (ब्लैक मेजिक) जन्मपत्री में अशुभ योग, नजर दोष, व्यापार में रूकावट ईत्यादि के लिए रात को गंगा जल में रखे, सुबह को कच्चा दूध, शहद, घी और दही के मिश्रण में रखें, गंगाजल से धोकर हनुमानजी के चरणों का सिंदुर से मस्तिष्क पर तिलक करें एवं ऊ हनुमंते नम: का 108 बार मंत्र जाप करें एवं धारण करें।

➡️वास्तु दोष निवारण के लिए रात को कच्चे दूध में डुबो कर रखें,सुबह गंगा जल से धोकर शिवलिंग पर रखकर दुध एवं जल का अभिषेक करें, घर के मुख्य द्वार पर टांग दे।

➡️जब भी हमे या बच्चो को घर के किसी कमरे या कोने मे अनजान वस्तु / छाया का अहसास हो, तो वहां पर कांच के बर्तन मे दो मच्छ मणि पानी मे रखने से नरात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कुछ ही मिनटों मे हो जाएगा।

➡️किडनी रोग, पेट रोग, निराशा, राहु गृह के शुभ प्रभाव बढ़ाने के लिए, काल सर्प दोष, केमद्रुम दोष, ग्रहण दोष, गुरु चांडाल दोष, नकरात्मकता, जिद्दीपन, शरीर मे थकावट, नजर दोष, ऊपरी बाधा व व्यापार बंधन के लिए मच्छ मणि को साबुत नमक के पानी मे भिगो कर राहु मंत्र (ॐ रां राहवे नमः) से 108 बार अभिमंत्रित कर धारण करना चाहिए।

➡️मणि किसी भी जीव मे ऑक्सलेट, कैल्शियम आदि तत्वों क़ी प्रकिया से बनती है। जैसे सर्प के मस्तक मे सर्प मणि, हाथी के मस्तक मे गज मणि, इंसान के शरीर मे स्टोन व मछली के मस्तक मे मच्छ मणि। मच्छ मणि का प्रभाव कुछ ही सेकंडो मे औरा स्कैनर से मापा जाता है।

➡️मछली राहु गृह कारक व कुछ मछली के मस्तक मे मच्छ मणि होती है। जिसे वह अपने मरने से कुछ देर पहिले उगल देती है।

➡️मच्छमणि कोई साधारण रत्न नहीं है बल्कि यह बहुत ही दुर्लभ मणि है। इसे पहनने वाले व्यक्ति को जीवन के हर प्रकार के तनाव से मुक्ति मिलती है और उसका जीवन खुशहाल बनता है।

➡️मच्छमणि एक दुर्लभ मणि है। राहू ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए इस मणि से बेहतर और कोई मणि नहीं हैं। यह एक प्राचीन मणि होने के साथ-साथ बहुत ही दुर्लभ मणि हैं।

➡️यह धारणकर्ता को सभी प्रकार के तनावों से मुक्त कर एक सुखी जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देता हैं। इसे धारण करने के बाद राहू ग्रह की पीड़ा शांत होती हैं। इस मणि के बारें में लोगों को अधिक जानकारी न होने के कारण यह अधिक प्रचलन में नहीं आ सका।

➡️कलयुग में व्यक्ति का जीवन भगादौडी वाला हो गया हैं, अच्छा जीवनयापन सभी चाहते हैं परन्तु हालात सभी के लिए एक जैसे नहीं रहते, जीवन में कई बार धन-संपत्ति, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि में दिक्कते आती हैं, ऐसे में अपनी इच्छाओं की पूर्ति और उत्तम स्वास्थ्य के लिए तंत्रएस्ट्रो.कॉम आपके लिए लेकर आये हैं 100% ओरिजनल मच्छमणि। अगर जीवन से हताश या निराश हैं तो, इस मणि को जरुर धारण करें।

मच्छमणि सम्बंधित पौराणिक कथा –

रामायण में हनुमान जी के एक पुत्र मकरध्वज की कथा का वर्णन है। मकरध्वज एक मछली के गर्भ से पैदा हुआ था जो न केवल एक मछली थी बल्कि वह एक मां भी थी। इस मछली ने अपने बेटे मकरध्वज की रक्षा के लिए अपने सिर से पत्थर निकाला और उसे अपने पुत्र को सौंप दिया। मकरध्वज का जन्म राहु काल में हुआ था। मछलियों के सिर के पत्थर का उपयोग कलियुग में राहु के बुरे प्रभावों और लोगों को रोगों से बचाने के लिए किया जाता है।रामायण का एक वृतांत है जब भगवान हनुमान ने लंका को जला दिया था और बाहर आ गए थे और समुद्र के ऊपर उड़ रहे थे, उस समय उनके शरीर का तापमान बहुत गर्म था।

इस वजह से उनके शरीर से बहुत पसीना शुरू लगा। इस पसीने के पसीने की बूंद समुद्र में तैर रही एक मछली के मुंह गिर गई। पसीने की इस बूंद से मछली गर्भवती हो गई और उसने भगवान हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज को जन्म दिया। इस मछली को अहिरावण ने पाताल लोक ले गया था और इसे काटने लगा। तब मकारध्वज नामक एक बंदर उस मछली के गर्भ से पैदा हुआ था। उसके हाथ में एक रत्न था। अहिरावण ने मकरध्वज से पूछा कि उसने एक मछली के गर्भ से कैसे जन्म लिया है और उनके हाथ में यह पत्थर क्या है।तब मकरध्वज ने उसे बताया कि यह पत्थर मेरी मां के सिर से निकला है।

अहिरावण को मछली को मारने का दुख हुआ और उन्होंने मकरध्वज को अपना मंत्री बना लिया। बाद में अहिरावण ने अपने भाई रावण के अनुरोध पर पाताल लोक में निडर के दौरान ही भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण का अपहरण कर लिया। जब हनुमान जी भगवान राम को मुक्त करने के लिए वहां पहुंचे तो उन्हें मकरध्वज से युद्ध करना पड़ा। मकरध्वज युद्ध हार गया और फिर उसने भगवान हनुमान जी को अपना परिचय दिया।

हनुमान जी ने मकरध्वज को गले लगाया और फिर उसे रस्सी से बांध दिया।हनुमान जी ने अहिरावण और उसके भाई महिरावण का वध किया और भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्त किया। तब वह भगवान राम को मकरध्वज से मिलवाने लाए। भगवान राम ने मकरध्वज को आशीर्वाद दिया और उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया और उन्हें बताया कि उनके पास जो पत्थर है वह दुर्लभ मछलियों के सिर से निकलेगा। जिस व्यक्ति के पास मच्छ मणि होता है वह खुशहाल जीवन बिताता है। यह राहु ग्रह बाधा निवारण के लिए अचूक रत्न है।मच्छमणि की उत्पत्ति –कहते हैं मच्छमणि श्रीलंका के समुद्र में बहुत गहरे पानी में रहने वाली मछली के पेट में बनती हैं।

पूर्णिमा की रात्रि को यह मछली समुद्र के तट पर तैरती हैं, उस समय मछुआरे मछली को अपनी टोकरी में पकड़ते हैं और अपने अनुभव से उनकों यह ज्ञात होता हैं कि कौनसी मछली के पेट में मच्छमणि है, मछली के पेट को दबाते ही मछली मणि को बाहर निकाल देती हैं और फिर मछुआरे उस मछली को पानी में वापिस छोड़ देते हैं। इस प्रकार से बड़े ही कड़े परिश्रम के बाद इस मच्छमणि की प्राप्ति होती हैं।

SHUKRA MANI STONE (चमत्कारी शुक्र मणि रत्न)

 

ज्‍योतिष के अनुसार मनुष्‍य के जीवन में शुक्र ग्रह बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लक्ष्मी जी, माँ काली और गुरु शुक्राचार्य जी को शुक्र ग्रह से सम्बंधित माना गया है। नौ ग्रहों में से एक शुक्र ग्रह को भी बहुत लाभकारी और शुभ माना गया है। यह व्‍यक्‍ति को सभी प्रकार के भौतिक सुख प्रदान करता है और सुख-सुविधाएं देता है। अगर शुक्र ग्रह मज़बूत है तो वह व्‍यक्‍ति को सभी प्रकार के भौतिक सुख प्रदान करता है और सुख-सुविधाएं देता है। परन्तु अगर शुक्र कमज़ोर है तो इंसान रोग, शोक, पीड़ा से पीड़ित हो सकता है। शुक्र ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए शुक्र मणि स्टोन बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

शुक्र मणि पहनने के लाभ –

  • जीवन में प्रेम, धन, आकर्षण, सौंदर्य और सुख की प्राप्‍ति के लिए शुक्र ग्रह की कृपा मिलना अनिवार्य है और शुक्र देव की कृपा दिलाता है शुक्र मणि रत्न ।
  • शुक्र मणि एक चमत्‍कारिक रत्‍न है जो आपके लिए सुखों एवं प्रेम के देवता शुक्र ग्रह को प्रसन्‍न करने का काम करता है।
    शुक्र का रत्‍न शुक्र मणि आपके जीवन को सुखों से परिपूर्ण और धन-धान्‍य से समृद्ध बना देता हैं ।
  • ज्‍योतिष के अनुसार मनुष्‍य के जीवन में ग्रहों का बहुत महत्‍व होता है। ग्रहों में से एक शुक्र ग्रह को भी बहुत लाभकारी और शुभ माना गया है। यह व्‍यक्‍ति को सभी प्रकार के भौतिक सुख प्रदान करता है और सुख-सुविधाएं देता है। वैवाहिक जीवन मे आ रही अड़चने दूर करता है । शादी में आ रही अड़चने दूर करने के लिए चांदी का बना यंत्र में शुक्रमणि धारण करनी चाहिये।
  • जिन लोगों का जन्‍म अप्रैल के महीने में हुआ है, उन्‍हें शुक्र मणि जरूर धारण करना चाहिए।
  • यह स्‍टोन हर तरह की बीमारियों एवं विकारों के इलाज में मदद करता है। मानसिक और शारीरिक व्‍याधियों से शुक्र मणि स्‍टोन आपको रक्षा प्रदान कर सकता है। यह बीमारी पैदा करने वाली ऊजाओं और नकारात्‍मकता को सोख लेता है और उन्‍हें पर्यावरण में छोड़ने में भी मदद करता है।
  • शुक्र ग्रह का भाग्‍य रत्‍न डायमंड होता है जो कि बहुत महंगा आता है। इस वजह से हर कोई डायमंड नहीं पहन पाता है और ऐसे में शुक्र मणि धारण कर आप अपने जीवन में शुक्र देव का आशीर्वाद पा सकते हैं।
  • चमत्‍कारिक शुक्र मणि सभी तरह की बुरी शक्‍तियों और ऊजाओं को नष्‍ट करता है। अगर कोई आपकी सफलता से जलता है या ईर्ष्‍या करता है तो शुक्र मणि ऐसे लोगों से आपकी रक्षा कर सकता है।
  • शुक्र मणि के प्रभाव से सभी अंगों से बीमारियां और विषाक्‍त पदार्थ निकालने में मदद मिलती है। यह शरीर को स्‍वस्‍थ रखने में भी लाभकारी है।
  • यदि आपकी याद्दाश्‍त कमजोर है या क्रिएटिव सोचने में दिक्‍कत होती है तो शुक्र मणि आपके दिमाग के बंद ताले को खोलकर आपकी मानसिक और बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
  • शुक्र मणि मूड को बेहतर कर सकता है और आपको अपने आसपास की नेगेटिविटी से बचाता है।

 

शुक्र मणि कैसे धारण करें –

शुक्‍ल पक्ष या किसी भी शुक्रवार की सुबह स्‍नान के बाद घर के पूजन स्‍थल में बैठ जाएं। एक तांबे का पात्र लें और उसमें कच्‍चा दूध या गंगाजल डालें। इसमें शुक्र मणि को डुबो दें और 108 बार ‘ऊं शुक्राय नम:’ का जाप करें। जाप पूर्ण होने पर धूप-दीप दें और फिर इसे धारण कर लें।

शुक्र मणि किस दिन पहनना चाहिए –

यह शुक्र ग्रह का रत्‍न है इसलिए इसे शुक्रवार के दिन धारण करना चाहिए।

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