Dakshinvarti Shankh दक्षिणावर्ती शंख Benefits of Dakshinvarti Shankh

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ज्योतिष के अनुसार ये शुक्र देव और लक्ष्मी जी की कारक वस्तु माना जाता है। इसको पास रखने मात्र से ही हर इच्छा पूरी होने लगती है। इस चिराग से हर तरह का वास्तु दोष दूर हो जाता है। धन और भौतिक सुख के कारक शुक्र और लक्ष्मी की प्रिय वस्तु माने जाने वाले इस चिराग को दक्षिणावर्ती शंख कहा जाता है।

साधारणत: मंदिर में रखे जाने वाले शंख उल्टे हाथ के तरफ खुलते हैं और बाज़ार में आसानी से ये कहीं भी मिल जाते हैं लेकिन दक्षिणावर्ती शंख एक दुर्लभ वस्तु है। ये आसानी से नहीं मिल पाता है क्योंकि दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है। इसलिए ही ज्योतिष में बताया गया है कि दक्षिणावृत्त शंख घर में होने पर लक्ष्मी का घर में वास रहता है।

तंत्र शास्त्र ने भी इस अनोखे चिराग के लिए कहा है कि सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग- अलग स्थान पर रखें तो हर तरह की परेशानियों का हल हो सकता है।

दक्षिणावर्ती शंख के लाभ –

  • दक्षिणावर्ती शंख पुण्य के ही योग से प्राप्त होता है। यह शंख जिस घर में रहता है, वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है। इसका प्रयोग अर्घ्य आदि देने के लिए विशेषत: होता है।
  • घर में यह शंख रखने से सम्मान की प्राप्ति, लक्ष्मी वृद्धि, यश और कीर्ति वृद्धि, संतान प्राप्ति, बाँझपन से मुक्ति, आयु की वृद्धि, शत्रु भय से मुक्ति, सर्प भय से मुक्ति, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है ।
  • दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर उसे जिसके ऊपर छिड़क दिया जाये तो वह व्यक्ति तथा वस्तु पवित्र हो जाता है |
  • सीधे हाथ की तरफ खुलने वाले शंख को यदि पूर्ण विधि-विधान के साथ लाल कपड़े में लपेटकर अपने घर में अलग- अलग स्थान पर रखें तो हर तरह की परेशानियों का हल हो सकता है।
  • दक्षिणावर्ती शंख को तिजोरी मे रखा जाए तो घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
  • वास्तु-दोषों को दूर करता है, यह शंख जहां होता है वहां कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। इनके पूजन से श्री समृद्धि आती है।
  • दक्षिणावर्ती शंख जहां भी रहता है, वहां धन की कोई कमी नहीं रहती।
  • दक्षिणावर्ती शंख को अन्न भण्डार में रखने से अन्न, धन भण्डार में रखने से धन, वस्त्र भण्डार में रखने से वस्त्र की कभी कमी नहीं होती। शयन कक्ष में इसे रखने से शांति का अनुभव होता है।
  • इसमें शुद्ध जल भरकर, व्यक्ति, वस्तु, स्थान पर छिड़कने से दुर्भाग्य, अभिशाप, तंत्र-मंत्र आदि का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
  • किसी भी प्रकार के टोने-टोटके इस शंख के आगे निष्फल हो जाते हैं।

पूजन और स्थापना की विधि –

तंत्र शास्त्र के अनुसार दक्षिणावर्ती शंख को विधि-विधान पूर्वक जल में रखने से कई प्रकार की बाधाएं शांत हो जाती है और भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। साथ ही धन संबंधी समस्याएं भी समाप्त हो जाती हैं। दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसका शुद्धिकरण इस प्रकार करना चाहिए- लाल कपड़े के ऊपर दक्षिणावर्ती शंख को रखकर इसमें गंगाजल भरें और कुश के आसन पर बैठकर इस मंत्र का जप करें :

“ऊँ श्री लक्ष्मी सहोदरया नम:”

इस मंत्र की कम से कम 1 माला जप करें और इसके बाद शंख को पूजा स्थान पर स्थापित कर दें |

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